Thursday, April 5, 2018

7th pay commission ,Latest minimum pay 21,000 and fitment factor 3.0 :वेतन बढाने को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों ने किया सवाल सांसदों के भत्ते बढाने को लेकर कहां से आया पैसा?

न्यूनतम वेतन 21000 और फिटमेंट फैक्टर 3.0 को लेकर आए जवाब में वित्त मंत्रालय से जो जवाब आया है उससे  सुनकर सभी केंद्रीय कर्मचारियों के बीच में रोष फैल गया है। बता दें कि केंद्रीय कर्मचारी कई वर्षों से मिनिमम  वेतन 21000 से बढ़ाकर 26000 और फिटमेंट फैक्टर को 3 गुना से बढ़ाकर 3.68 गुणा करने की मांग कर रहे हैं  जो कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से परे है, इसके जवाब में सरकार का कहना है कि मिनिमम वेतन को इतना बढ़ाने से उनके सरकारी खजाने पर बहुत बड़ा बोझ पड़ेगा। जबकी इसके बावजूद सरकार ने  सांसदों के भक्तों में 1 अप्रैल से बहुत बड़ी भारी बढ़ोतरी करी है ।सांसदों के भत्ते 90,000 प्रति माह कर दी है। इसे नाराज सरकारी कर्मचारियों ने सवाल किया है कि सांसदों के भत्ते को बढ़ाने को लेकर सरकार के पास इतना पैसा कहां से आया । आपको बता दे  कि केंद्रीय कर्मचारी एक लंबे समय से वेतन वृद्धि की आश कर रहे थे और वित्त मंत्री अरूण जेटली जी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वह सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से परे वेतन को बढ़ाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ ।हाल ही में 6 मार्च को उनसे किए गए सवाल जिसमें पूछा गया था: क्या केंद्रीय कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने के लिए सरकार सक्रिय रुप से कार्य कर रही है तो पी.राधाकृष्ण का जवाब आया उसमें  कि वेतन बढाने को लेकर सरकार का अभी कोई विचार नही है। इसके अलावा वर्ष 2003 के बाद भर्ती सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने से सरकार के इंकार से सरकारी कर्मचारी नाराज है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2003 के बाद सरकार ने कर्मचारियों को पेंशन देना बंद कर दी है, जबकि इसके एवज में कर्मचारी भविष्य निधि से कुछ अंश पेंशन के रूप में देने का प्रावधान किया गया है। कर्मचारी इस संबंध में हर स्तर पर अपनी बात उठा रहे हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।अब सांसद के भत्ते एक लाख नब्बे हजार रुपये प्रतिमाह हो गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इसके लिए पैसा कहां से आएगा? सरकार इस पर मौन क्यों है? उन्होंने कहा कि समाजसेवा का नाम लेकर संसद व विधानसभाओं में पहुंचने वाले राजनीतिज्ञ सिर्फ अपना भला ही सोच रहे हैं, जबकि जनता की भलाई कोसों दूर हो गई है। जनता की सेवाएं लेने के बाद उन्हें उचित वेतन व पेंशन तक नहीं मिलती। केन्द्रीय कर्मचारी जवाब चाहते हैं लेकिन सरकार ने चुप्पी साध रखी है।

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